Tīrtha-yātrā: Phalaśruti and Sacred Geography from Lohitya to Prayāga
Pulastya’s Instruction
किंदत्तं कूपमासाद्य तिलप्रस्थं प्रदाय च,किंदत्त नामक कूपके समीप जाकर एक प्रस्थ अर्थात् सोलह मुट्ठी तिल दान करे। कुरुश्रेष्ट! ऐसा करनेसे मनुष्य तीनों ऋणोंसे मुक्त हो परम सिद्धिको प्राप्त होता है। वेदीतीर्थमें स्नान करनेसे मनुष्य सहस्र गोदानका फल पाता है
至名为金达多(Kiṃdatta)之井,施以一钵罗萨他(prastha)芝麻——约十六把。噢,俱卢中之最胜者,如此行者,便得脱离三重之债,而获至上成就(siddhi)。又于韦底提尔他(Vedītīrtha)沐浴,则得施千牛之功德。
घुलस्त्य उवाच