Dharma-śaṅkā-nivāraṇa: Yudhiṣṭhira’s Response on Karma-Phala and Trust in Dharma
सर्वे हि स्वं समुत्थानमुपजीवन्ति जन्तव: । अपि धाता विधाता च यथायमुदके बक:,यह जलके समीप जो बगुला बैठकर (मछलीके लिये) ध्यान लगा रहा है, उसीके समान ये सभी प्राणी अपने उद्योगका आश्रय लेकर जीवन धारण करते हैं। धाता और विधाता भी सदा सृष्टिपालनके उद्योगमें लगे रहते हैं
一切众生皆依自身奋起与勤作而得以维生。譬如鹭鸟(baka)临水而坐,凝神专注以伺捕鱼;众生亦复如是,凭借自身的事业与努力而存活。即便是持世之主达塔(Dhātā)与制定之主毗达塔(Vidhātā),亦恒常勤于护持造化、维系世界。
युधिछिर उवाच