युधिछिर उवाच देवदेवो मया दृष्टो भवान् साक्षात् सनातन: । य॑ं ददासि वर तुष्टस्तं ग्रहीष्याम्यहं पित:,युधिषछ्टिर बोले--पिताजी! आप सनातन देवाधिदेव हैं। आज मुझे साक्षात् आपके दर्शन हो गये। आप प्रसन्न होकर मुझे जो भी वर देंगे, उसे मैं शिरोधार्य करूँगा
yudhiṣṭhira uvāca devadevo mayā dṛṣṭo bhavān sākṣāt sanātanaḥ | yaṁ dadāsi vara tuṣṭas taṁ grahīṣyāmy ahaṁ pitaḥ ||
尤提士提罗说道:“父亲啊,我已亲见您——永恒的神中之神。您若欢喜赐我何等恩赐,我必以至敬领受。”
युधिछिर उवाच