युधिछ्िर उवाच धर्मज्ञ: पण्डितो ज्ञेयो नास्तिको मूर्ख उच्यते । काम: संसारहेतुश्न हृत्तापो मत्सर: स्मृत:,युधिष्ठिर बोले--धर्मज्ञको पण्डित समझना चाहिये, मूर्ख नास्तिक कहलाता है और नास्तिक मूर्ख है तथा जो जन्म-मरणरूप संसारका कारण है, वह वासना काम है और हृदयकी जलन ही मत्सर है
yudhiṣṭhira uvāca | dharmajñaḥ paṇḍito jñeyo nāstiko mūrkha ucyate | kāmaḥ saṃsāra-hetuś ca hṛt-tāpo matsaraḥ smṛtaḥ ||
尤提士提罗答道:“知达摩者,当认作智者(paṇḍita);不信者(nāstika)被称为愚人。欲(kāma)乃使众生系缚于生死轮回之因;而嫉妒(matsara)乃心中灼痛之火。”
युधिछ्िर उवाच