युधिछिर उवाच आनुशंस्यं परो धर्मस्त्रयी धर्म: सदाफल: । मनो यम्य न शोचन्ति संधि: सदभिर्न जीर्यते,युधिष्ठिर बोले--लोकमें दया श्रेष्ठ धर्म है, वेदोक्त धर्म नित्य फलवाला है, मनको वशभमें रखनेसे मनुष्य शोक नहीं करते और सत्पुरुषोंके साथ की हुई मित्रता नष्ट नहीं होती
尤提士提罗答道:“慈悲为世间最高之法;依三吠陀而行之法,恒结不虚之果;制伏其心,人便不复忧伤;与贤善之士所结之交,永不衰败。”
युधिछिर उवाच