अस्मिन् महामोहमये कटाहे सूर्याग्निना रात्रिदिवेन्धनेन । मारसत्दर्वीपरिघट्टनेन भूतानि काल: पचतीति वार्ता,इस महामोहरूपी कड़ाहेमें भगवान् काल समस्त प्राणियोंको मास और ऋतुरूप करछीसे उलट-पलटकर सूर्यरूप अग्नि और रात-दिनरूप ईंधनके द्वारा राँध रहे हैं, यही वार्ता है
尤提士提罗说道:“在这充满大迷妄的巨釜之中,时神迦罗(Kāla)烹煮一切众生:以太阳为火,以昼夜为薪,以月与季节为勺,翻搅不息。此即所谓‘世间之语’(vārttā)。”
युधिछिर उवाच