Sūrya’s Counsel to Karṇa on Indra’s Intended Request
Kuṇḍala–Kavaca Discourse
सो<स्मानतर्कयद् भोक्तुमथा भ्येत्य वचो5ब्रवीत् | भो: क एष मम भ्रातुर्जटायो: कुरुते कथाम्,“वह पक्षी हमें खा जानेकी युक्ति सोचने लगा। फिर हमारे पास आकर बोला--“अजी! कौन मेरे भाई जटायुकी बात कर रहा था। मैं उसका बड़ा भाई पक्षिराज सम्पाति हूँ। हम दोनों एक-दूसरेसे होड़ लगाकर आकाशमें सूर्यमण्डलतक पहुँचनेके लिये उड़े थे
so ’smān atarkayad bhoktum athābhyetya vaco ’bravīt | bhoḥ ka eṣa mama bhrātur jaṭāyoḥ kurute kathām ||
马尔坎德耶说道:“它开始盘算要如何吞食我们;随后靠近,开口道:‘喂!是谁在谈论我的弟弟阇多由(Jatāyu)?’”
मार्कण्डेय उवाच