Sūrya’s Counsel to Karṇa on Indra’s Intended Request
Kuṇḍala–Kavaca Discourse
तया दत्तानि भोज्यानि पानानि विविधानि च । भुक्त्वा लब्धबला: सन्तस्तयोक्तेन पथा ततः,“उसने हमें अनेक प्रकारके भोज्य पदार्थ तथा भाँति-भाँतिके पीने योग्य रस दिये। उन्हें खाकर हमें नूतन बल प्राप्त हुआ। फिर उसीके बताये हुए मार्गसे जब हम गुफासे बाहर निकले, तब हमें लवणसमुद्रके निकटवर्ती सह, मलय और दर्दुर नामक महानू पर्वत दिखायी दिये
tayā dattāni bhojyāni pānāni vividhāni ca | bhuktvā labdhabalāḥ santaḥ tayoktena pathā tataḥ ||
她为我们备下种种饮食与饮料。我们食用之后,气力复苏;随后依她所指示的道路,继续前行。
मार्कण्डेय उवाच