Sāvitrī’s Trirātra-Vrata and Departure with Satyavān (सावित्रीव्रतनिश्चयः सहगमनं च)
पप्रच्छ रामस्तं वाग्मी कस्त्वं प्रब्रूहि पृच्छत: । कामया किमिदं चित्रमाश्चर्य प्रतिभाति मे,तब कुशल वक्ता भगवान् श्रीरामने उससे पूछा--'तुम कौन हो? अपना परिचय दो। मेरे पूछनेपर अपनी इच्छाके अनुसार बताओ, यह कैसी अद्भुत एवं आश्चवर्यमयी घटना प्रतीत हो रही है?”
于是善言的罗摩问他:“你是谁?既然我发问,便请明言你的来历。随你所愿作答:此事为何在我眼前显得如此奇异而惊人?”
मार्कण्डेय उवाच