स प्रविश्याश्रमपदमपविद्धबूसीमठम् । मार्कण्डेयादिभिर्विप्रैरनुकीर्ण ददर्श ह,उन्होंने आश्रममें प्रवेश करके देखा कि बैठनेके आसन और स्वाध्यायके लिये बनी हुई पर्णशालामें सब वस्तुएँ इधर-उधर बिखरी पड़ी थीं। मार्कण्डेय आदि ब्रह्मर्षि वहाँ इकट्ठे हो रहे थे
他进入隐修林地,见坐具与供诵习自修(svādhyāya)之叶舍皆被弃置凌乱,诸物散落四处。马尔坎德耶等婆罗门大圣贤正在那里聚集。
वैशम्पायन उवाच