प्रीतो5स्मि तव राजेन्द्र विक्रमेण बलेन च । न ते विघ्नं करिष्यामि प्रतिज्ञां समपालयम्,“राजेन्द्र! मैं तुम्हारे बल और पराक्रमसे बहुत प्रसन्न हूँ। अतः तुम्हारे कार्यमें विघ्न नहीं डालूँगा। थोड़ी देर युद्ध करके मैंने केवल क्षत्रियधर्मका पालन किया है
“王中之王啊!我因你的勇武与气力而心生欢喜。故而我不再阻挠你的事业;我将守持我的誓言。方才那短暂交锋,不过是为尽刹帝利之法——武士之道。”
वैशम्पायन उवाच