मुद्गलोपाख्यानम् — व्रीहिद्रोणदानं, दुर्वाससः परीक्षा, स्वर्गगुणप्रश्नः
Mudgala Episode: Rice-measure Charity, Durvāsas’ Test, Inquiry on Heaven
अन्तर्धानवधं चास्य चक्रे क्रुद्धो$र्जुनस्तदा । शब्दवेधं समाश्रित्य बहुरूपो धनंजय:,(रणभूमिमें सब ओर विचरनेके कारण) उस समय अर्जुन अनेक रूप धारण किये हुए जान पड़ते थे। उन्होंने कुपित होकर शब्दवेधका सहारा ले चित्रसेनकी अन्तर्धानरूप मायाको भी नष्ट कर दिया
当时阿周那怒起,依“循声而射”(śabda-vedha)之术,亦破除了对方以隐遁为相的幻力。又因他在战场四方疾行,胜财者(Dhanañjaya)看似化现多身多形。
वैशम्पायन उवाच