अग्निवंशवर्णनम् (Agni-vaṃśa-varṇana) / The Genealogy and Function of Agni
येषु विप्रतिपद्यन्ते घट्सु मोहातू फलागमम् । तेष्वध्यवसिताध्यायी विन्दते ध्यानजं फलम्,सभी मनुष्य इन छः इन्द्रियोंके शब्द आदि विषयोंमें उनसे प्राप्त होनेवाले सुखरूप फल पानेके सम्बन्धमें मोहसे संशयमें पड़ जाते हैं। परंतु जो उनके दोषोंका अनुसंधान करनेवाला वीतराग पुरुष है, वह उनका निग्रह करके ध्यानजनित आनन्दका अनुभव करता है
yeṣu vipratipadyante ṣaṭsu mohāt phalāgamam | teṣv adhyavasitādhyāyī vindate dhyānajaṃ phalam ||
猎人说道:“世人被迷妄所惑,对于六种境界——如声等——所能得之‘果’,即他们所期待的乐,常起疑惑。然而离贪之人,专志考察其过患,内在戒持坚决,便能摄伏诸根,获得由禅观而生之果——那从观照中涌现的喜乐,而非由感官而来。”
व्याध उवाच