Dharma-vyādha’s Analysis of Moral Decline and the Mahābhūta–Guṇa Schema (धर्मव्याधोपदेशः)
न ज्ञातिभ्यो दया यस्य शुक्लदेहोडविकल्मष: । हिंसा सा तपसस्तस्य नानाशित्वं तप: स्मृतम्,जिसने व्रत, उपवास आदिके द्वारा शरीरको तो शुद्ध कर लिया और जो नाना प्रकारके पापकर्म भी नहीं करता, किंतु जिसके मनमें अपने कुटुम्बी जनोंके प्रति दया नहीं आती, उसकी वह निर्दयता उसके तपका नाश करनेवाली है; केवल भोजन छोड़ देनेका ही नाम तपस्या नहीं है
na jñātibhyo dayā yasya śukla-deho 'davikalmaṣaḥ | hiṃsā sā tapasas tasya nānāśitvaṃ tapaḥ smṛtam ||
尤提士提罗说道:“有人以誓戒与断食使其身外表清净,又避诸般罪业;然而若对自家亲族毫无悲悯,则其心之刚硬便成一种暴行,足以毁坏其苦行。苦行并非仅是弃食而已。”
युधिछिर उवाच