उत्तङ्कोपाख्यानप्रारम्भः — Uttanka’s Tapas, Viṣṇu-stuti, and the Dhundhumāra Prophecy
Opening
वैशम्पायन उवाच श्रुत्वा तु वचनं तस्य मार्कण्डेयस्य धीमत:ः,वैशम्पायनजी कहते हैं--राजन्! उन परम बुद्धिमान् मार्कण्डेयजीका वचन सुनकर भगवान् श्रीकृष्णसहित पाँचों पाण्डव बड़े प्रसन्न हुए। साथ ही जो श्रेष्ठ ब्राह्मण वहाँ पधारे थे, उन सबको भी बड़ी प्रसन्नता हुई
毗舍波耶那说道:“大王啊!听闻至智的摩尔甘德耶仙人之言后,五位般度子与持娑尔恩伽神弓的圣克里希纳同在,皆欣喜充满。凡彼处聚集的诸位上首婆罗门,也同样大为欢悦。”
वैशम्पायन उवाच