इन्द्रद्युम्नोपाख्यानम्
Indradyumna Upākhyāna: On Kīrti, Smṛti, and Restoration
निम्ने कृषिं करिष्यन्ति योक्ष्यन्ति धुरि धेनुका: । एकहायनवत्सांशक्ष॒ योजयिष्यन्ति मानवा:,मनुष्य नीची भूमिमें (अर्थात् गायोंके जल पीने और चरनेकी जगहमें) खेती करेंगे। दूध देनेवाली गायोंको भी बोझ ढोनेके काममें लगा देंगे और सालभरके बछड़ोंको भी हलमें जोतेंगे
人们将于低洼之地耕作,甚至在牛饮水食草之处也开垦田亩。产乳之母牛亦被套上轭具以负重,而一岁之犊也将被牵入犁中。
मार्कण्डेय उवाच