Adhyāya 188: Mārkaṇḍeya’s Account of Yuga-Decline and the Restoration Motif
Kali-yuga to Kalki
सम्प्रक्षालनकालो<यं लोकानां समुपस्थित: । तस्मात् त्वां बोधयाम्यद्य यत् ते हितमनुत्तमम्,“यह सब लोकोंके सम्प्रजक्ञालन (एकार्णवके जलसे धुलकर नष्ट होने)-का समय आ गया है। इसलिये मैं आपको सचेत करता हूँ और आपके लिये जो परम उत्तम हितकी बात है, उसे बताता हूँ
“诸世界将被洪水洗荡的时刻已经到来。因此我今日警醒于你,并将告知你那对你最为殊胜的利益之道。”
मार्कण्डेय उवाच