प्रावृट्-शरत्-वर्णनम् — Description of the Monsoon and Autumn; Sarasvatī in the Pāṇḍavas’ Exile
वृक्षानुत्पाटपामास तरसा वै बभज्ज च पृथिव्याश्व प्रदेशान् वै नादयंस्तु वनानि च,उनमें सैकड़ों मतवाले गजराजोंके समान बल था। वे एक साथ सौ-सौ मनुष्योंका वेग रोक सकते थे। उनका पराक्रम सिंह और शार्दूलके समान था महाबली भीम उस वनमें वृक्षोंको उखाड़ते और उन्हें वेगपूर्वक पुनः तोड़ डालते थे। वे अपनी गर्जनासे उस वन्य भूमिके प्रदेशों तथा समूचे वनको गुँजाते रहते थे
vaiśampāyana uvāca |
vr̥kṣān utpāṭayām āsa tarasā vai babhañja ca |
pr̥thivyāś ca pradēśān vai nādayaṃs tu vanāni ca ||
毗湿摩波耶那说道:毗摩以猛烈之势不断拔起树木,又将其击碎。凭借他的咆哮,那片荒野的地带与整座森林都为之回响——显出如发情象王般的巨力与如狮虎般的勇猛,足以同时遏止众人之冲。
वैशम्पायन उवाच