निवातकवचवधः — Arjuna’s Neutralization of the Nivātakavacas
Vajra-astra deployment
न त्वमद्य युधा जेतुं शक््य: सुरगणैरपि । कि पुनर्मनुषे लोके मानुषैरकृतात्मभि:,“अर्जुन! अब तुम्हें युद्धमें देवता भी परास्त नहीं कर सकते। फिर मर्त्यलोकमें रहनेवाले बेचारे असंयमी मनुष्योंकी तो बात ही क्या है?
na tvam adya yudhā jetuṃ śakyaḥ suragaṇair api | ki punar manuṣe loke mānuṣair akṛtātmabhiḥ ||
“阿周那!如今在战场上,即便诸天神众也不能战胜你;更何况那人间世上、心性未驯的凡夫俗子呢?”
अजुन उवाच