इन्द्रस्य पाण्डवैः समागमः
Indra’s Meeting with the Pāṇḍavas
ददृशुर््डष्टरोमाण: पाण्डवा: प्रियदर्शनम् । कुबेरस्तु महासत्त्वान् पाण्डो: पुत्रान् महारथान्,धनाध्यक्ष कुबेरके द्वारा पालित घोड़ोंके उस महा समुदायको तथा यक्ष-राक्षसोंसे घिरे हुए प्रियदर्शन महामना कुबेरको भी पाण्डवोंने देखा। देखकर उनके अंगोंमें रोमाउ्च हो आया। इधर कुबेर भी धनुष और तलवार लिये शक्तिशाली महारथी पाण्डुपुत्रोंकी देखकर बड़े प्रसन्न हुए। कुबेर देवताओंका कार्य सिद्ध करना चाहते थे, इसलिये मन-ही-मन पाण्डवोंसे बहुत संतुष्ट हुए
Vaiśampāyana uvāca | dadṛśur daṣṭaromāṇaḥ pāṇḍavāḥ priyadarśanam | kuberaḥ tu mahāsattvān pāṇḍoḥ putrān mahārathān ||
毗湿摩耶那说:般度五子看见那光辉的俱毗罗,仪容悦目;一见之下,周身战栗,毫毛竖立。俱毗罗亦然,见到般度之子——那些雄健的大战车武士——便满心欢喜,暗自嘉许他们,因为他求的是诸天事业的成就。
वैशम्पायन उवाच