Kubera’s Fivefold Nīti and Protection of the Pāṇḍavas (वैश्रवणोपदेशः)
शिखण्डिनीभि: सहिताँललतामण्डलकेषु च । मेघतूर्यरवोद्दाममदनाकुलितान् भृूशम्,वहाँ लता-मण्डपोंमें मोरिनियोंके साथ नाचते हुए मोर दिखायी देते थे। जो मेघोंकी मृदंगतुल्य गम्भीर गर्जना सुनकर उद्दाम कामसे अत्यन्त उन्मत्त हो रहे थे। वे अपनी मधुर केकाध्वनिका विस्तार करके मीठे स्वरमें संगीतकी रचना करते थे और अपनी विचित्र पाँखें फैलाकर विलासयुक्त मदालसभावसे वनविहारके लिये उत्सुक हो प्रसन्नताके साथ नाच रहे थे। कुछ मोर लतावल्लरियोंसे व्याप्त कुटजवृक्षोंके कुज्जोंमें स्थित हो अपनी प्यारी मोरिनियोंके साथ रमण करते थे और कुछ कुटजोंकी डालियोंपर मदमत्त होकर बैठे थे तथा अपनी सुन्दर पाँखोंके घटाटोपसे युक्त हो मुकुटके समान जान पड़ते थे। कितने ही सुन्दर मोर वृक्षोंके कोटरोंमें बैठे थे। पाण्डवोंने उन सबको देखा
śikhaṇḍinībhiḥ sahitāṁ lalitāmaṇḍalakeṣu ca | meghatūrya-ravoddāma-madanākulitān bhṛśam ||
毗湿摩波耶那说道:在婀娜的藤棚花架之间,可见孔雀与孔雀雌鸟相伴起舞——一听云层深沉如鼓的轰鸣,欲火便狂涌,使它们极度躁动不宁。它们把甜美的鸣声拉长成悠扬的音节,仿佛在谱写乐曲;又展开斑斓的尾屏,以戏谑而慵懒的姿态在林间舞动,欢悦而渴望山林之游。有的隐在藤蔓缠覆的苦楝花(kuṭaja)丛中,与爱侣嬉戏;有的醉于时令,栖在kuṭaja高枝之上,浓密华美的羽衣宛如冠冕;还有许多俊美的孔雀停在树洞之中。般度五子尽皆目睹。
वैशम्पायन उवाच