Kṛṣṇasya asāṃnidhya-kāraṇaṃ — Śālva–Soubha-vṛttāntaḥ
Why Kṛṣṇa was absent; the Śālva and Saubha account
दत्तवेतनभक्तं च दत्तायुधपरिच्छदम् | कृतोपधानं च तदा बलमासीन्महाभुज,महाबाहो! उस समय सेनाके प्रत्येक सैनिकको पूरा-पूरा वेतन और भत्ता चुका दिया गया था। सबको नये-नये हथियार और पोशाकें दी गयी थीं और उन्हें विशेष पुरस्कार आदि देकर उनका प्रेम और विश्वास प्राप्त कर लिया गया था
“大臂勇者啊,当时军旅已备置周详:每一名士卒的军饷与给养皆已足额发放;兵刃与军装器具悉数配给;又预作储备,并以厚赏笼络其心,使其信任与忠诚坚固不移。”
वायुदेव उवाच