Gaṅgā-Tīrtha Darśana and the Prelude to the Yavakrīta–Indra Exemplum (लोमश-युधिष्ठिर संवादः)
ततोडष्टावक्रमातुरथान्तिके पिता नदीं समड्जां शीघ्रमिमां विशस्व । प्रोवाच चैनं स तथा विवेश समैरद्जैश्वापि बभूव सद्य:,तदनन्तर पिता कहोडने अष्टावक्रकी माता सुजाताके निकट पुत्र अष्टावक्रसे कहा--“बेटा! तुम शीघ्र ही इस “समंगा” नदीमें स्नानके लिये प्रवेश करो।' पिताकी आज्ञाके अनुसार उन्होंने उस नदीमें स्नानके लिये प्रवेश किया। उसके जलका स्पर्श होनेपर तत्काल ही उनके सब अंग सीधे हो गये
tato ’ṣṭāvakram āturathāntike pitā nadīṁ samaṅgāṁ śīghram imāṁ viśasva | provāca cainaṁ sa tathā viveśa samair aṅgaiś cāpi babhūva sadyaḥ ||
随后,他的父亲迦诃陀近前对阿湿多伐克罗说道:“孩子,快入这娑曼伽河中沐浴。”他遵从父命踏入河水;水一触其身,顷刻之间,他的四肢百骸尽皆挺直端正,形体完好。
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