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Shloka 11

Plakṣāvataraṇa–Yamunā Tīrtha and Prajāpati’s Vedī

Kurukṣetra Threshold

अद्य चात्र निवत्स्याम: क्षपां भरतसत्तम । द्वारमेतत्‌ तु कौन्तेय कुरुक्षेत्रस्य भारत,भरतश्रेष्ठ! (इस किंवदन्तीके अनुसार किसीको भी यहाँ एक ही रात रहना चाहिये) अतः हमलोग केवल आजकी रातमें ही यहाँ निवास करेंगे। युधिष्ठिर! यह तीर्थ कुरुक्षेत्रका द्वार बताया गया है

“因此,婆罗多族的至杰啊,今夜我们也只在此住这一宿。坤提之子啊,婆罗多啊,此处圣地被称作库鲁之野(俱卢战场)之门。”

लोगश उवाच