सगरोपाख्यानम् (Sagara-Upākhyāna): Śiva’s boon and the extraordinary birth of Sagara’s progeny
देवा ऊचु सूर्याचन्द्रमसोर्मार्ग नक्षत्राणां गतिं तथा । शैलराजो वृणोत्येष विन्ध्य: क्रोधवशानुग:,देवता बोले--द्विजश्रेष्ठ। यह पर्वतराज विन्ध्य क्रोधके वशीभूत होकर सूर्य और चन्द्रमाके मार्ग तथा नक्षत्रोंकी गतिको रोक रहा है। महाभाग! आपके सिवा दूसरा कोई इसका निवारण नहीं कर सकता। अत: आप चलकर इसे रोकिये
devā ūcuḥ sūryācandramasor mārgaṁ nakṣatrāṇāṁ gatiṁ tathā | śailarājo vṛṇoty eṣa vindhyaḥ krodhavaśānugaḥ ||
诸神说道:“噢,最胜之二生者!此山中王毗陀耶为忿怒所制,阻塞日与月之行道,亦妨碍群星之运行。除你之外,无人能止此事。故请前往,制止于他。”
लोमश उवाच