अध्याय ८२ — केशवप्रयाणे निमित्तदर्शनम्
Omens and Reception During Keśava’s Departure
त॑ दीप्तमिव कालाग्निमाकाशगमिवाशुगम् । सूर्यचन्द्रप्रकाशा भ्यां चक्राभ्यां समलंकृतम्,वह रथ प्रलयकालीन अग्निके समान दीप्तिमान्ू, विमानके सदृश शीघ्रगामी तथा सूर्य और चन्द्रमाके समान तेजस्वी दो गोलाकार चक्रोंसे सुशोभित था
taṁ dīptam iva kālāgnim ākāśagam ivāśugam | sūryacandraprakāśābhyāṁ cakrābhyāṁ samalaṅkṛtam ||
毗湿摩波耶那说:那战车炽然如劫末时轮之火;疾驰如穿行长空之物。车上饰有两轮,光辉灿烂,宛如日月同照。
वैशम्पायन उवाच