Udyoga-parva Adhyāya 71 — Kṣatra-dharma Counsel, Public Legitimacy, and Mobilization
धनमाहूु: परं धर्म धने सर्व प्रतिष्ठितम् । जीवन्ति धनिनो लोके मृता ये त्वधना नरा:,धनको उत्तम धर्मका साधक बताया गया है। धनमें सब कुछ प्रतिष्ठित है। संसारमें धनी मनुष्य ही जीवन धारण करते हैं। जो निर्धन हैं, वे तो मरे हुएके ही समान हैं
人们说:财富乃至上之法;万事皆依财富而立。世间唯有富者方能存身;贫者则如同已死之人。
युधिछिर उवाच