धृतराष्ट्रस्य बलाबलचिन्ता
Dhṛtarāṣṭra’s Appraisal of Strength and Preference for Śama
शमो मे रोचते नित्य॑ पार्थैसतात न विग्रह: । कुरुभ्यो हि सदा मन्ये पाण्डवान् शक्तिमत्तरान्,“कौरवोंके लिये यह महान् विनाशका अवसर उपस्थित हुआ है। तात! यदि इस कलहका अन्त करनेके लिये संधिके सिवा और कोई उपाय नहीं है तो मुझे सदा संधिकी ही बात अच्छी लगती है; कुन्तीपुत्रोंके साथ युद्ध छेड़ना ठीक नहीं है। मैं सदा पाण्डवोंको कौरवोंसे अधिक शक्तिशाली मानता हूँ”
vaiśampāyana uvāca |
śamo me rocate nityaṃ pārthaiḥ sātatā na vigrahaḥ |
kurubhyo hi sadā manye pāṇḍavān śaktimattarān ||
毗舍摩波耶那说道:“和平于我恒为可喜;对普利塔之子,我不赞成争斗。因为我久已认定般度五子强于库鲁诸人。故而对俱卢诸子而言,此刻已成通往大祸的门户;若终止此纷争别无良方,唯有和议,那么我所不断称许的也唯有和议。”
वैशम्पायन उवाच