Udyoga-parva Adhyāya 34 — Vidura’s Counsel on Deliberation, Speech-Discipline, and Dharmic Kingship
कि वै सहैवं चरथो न पुरा चरथ: सह । विरोचनैतत् पृच्छामि कि ते सख्यं सुधन्वना,[फिर प्रकटरूपमें विरोचनसे कहा--] विरोचन! मैं तुमसे पूछता हूँ, क्या सुधन्वाके साथ तुम्हारी मित्रता हो गयी है? फिर कैसे एक साथ आ रहे हो? पहले तो तुम दोनों कभी एक साथ नहीं चलते थे
kiṁ vai sahaivaṁ caratho na purā carathaḥ saha | virocanaitat pṛcchāmi kiṁ te sakhyaṁ sudhanvanā ||
普罗诃罗陀说道:“你们二人为何如此并行而来?从前你们从不结伴同行。毗罗遮那,我直问你——你已与苏檀梵结为朋友了吗?若是如此,这同伴之行又因何而起?”
प्रह्माद उवाच