Udyoga-parva Adhyāya 28: Dharmādharmalakṣaṇa in Āpad
Crisis-Discernment of Right and Wrong
निर्वनो वध्यते व्याप्रो निर्व्याच्रंं छिद्यते वनम् । तस्माद् व्याप्रो वन रक्षेद् वन॑ व्याप्रं च पालयेत्,क्योंकि वनसे बाहर निकला हुआ व्याप्र मारा जाता है और बिना व्याप्रके वनको सब लोग आसानीसे काट लेते हैं। अतः व्याप्र वनकी रक्षा करे और वन व्याप्रकी
“野兽离林,必遭猎杀;森林无兽,亦易为人砍伐。是故,兽当护林,林亦当庇兽。”
वायुदेव उवाच