अम्बा–राम–भीष्म संवादः
Amba–Rama–Bhishma Dialogue on Vow and Refuge
को जातु परभावां हि नारीं व्यालीमिव स्थिताम् | वासयेत गृहे जानन् स्त्रीणां दोषो महात्यय:,“दूसरेके प्रति अनुराग रखनेवाली नारी सर्पिणीके समान भयंकर होती है। कौन ऐसा पुरुष होगा, जो जान-बूझकर उसे कभी भी अपने घरमें स्थान देगा; क्योंकि स्त्रियोंका (परपुरुषमें अनुरागरूप) दोष महान् अनर्थका कारण होता है
ko jātu parabhāvāṁ hi nārīṁ vyālīm iva sthitām | vāsayet gṛhe jānan strīṇāṁ doṣo mahātyayaḥ ||
“谁会明知而仍让一个心系他人的女子住在家中——凶险如雌蛇?因为女子之过——恋慕他男——终将成为大祸之因。”
राम उवाच