अध्याय १६९ — भीष्मस्य पाण्डवसेनाप्रशंसा तथा शिखण्डिविषये नियमः
Bhīṣma’s Appraisal of Pāṇḍava Forces and His Constraint Regarding Śikhaṇḍin
२-27: हु हक अल सप्तत्याधिेकशततमो< ध्याय: पाण्डवपक्षके रथियों और महारथियोंका वर्णन तथा विराट और द्रुपदकी प्रशंसा भीष्म उवाच द्रौपदेया महाराज सर्वे पजच महारथा: । वैराटिरुत्तरशक्षैव रथोदारो मतो मम,भीष्मजी कहते हैं--महाराज! द्रौपदीके जो पाँच पुत्र हैं, वे सब-के-सब महारथी हैं। विराटपुत्र उत्तरको मैं उदार रथी मानता हूँ
bhīṣma uvāca | draupadeyā mahārāja sarve pañca mahārathāḥ | vairāṭir uttaraś caiva rathodāro mato mama ||
毗湿摩说道:“大王啊,德劳帕迪的五子皆为摩诃车战士(mahāratha)。而维罗吒之子乌多罗,在我看来亦是高贵卓然的车战勇士。”
भीष्म उवाच