भीष्मकृतः पाण्डवपक्ष-महारथ-प्रशंसा
Bhishma’s appraisal of Pandava-aligned chariot-warriors
बलज्येष्ठं स्मृतं क्षत्रं मन्त्रज्येष्ठा द्विजातय: । धनज्येष्ठा: स्मृता वैश्या: शूद्रास्तु ववसाधिका:,'क्षत्रियजातिमें जो बलमें अधिक हो, वही श्रेष्ठ माना गया है। ब्राह्मण वेदमन्त्रोंके ज्ञानसे, वैश्य अधिक धनसे और शूद्र अधिक आयु होनेसे श्रेष्ठ समझे जाते हैं
“在刹帝利之中,以力量为最者被记为上首;在二生者(婆罗门)之中,以吠陀真言之学为最者为上首;在吠舍之中,以财富为最者为上首;而首陀罗则以服役勤作之能为上首。”
भीष्म उवाच