अग्निस्तुति, इन्द्रदर्शन, नहुष-भयवर्णन
Agni-hymn, discovery of Indra, and the Nahuṣa threat
शल्य उवाच प्रविश्यापस्ततो वह्निः ससमुद्रा: सपल्वला: । आससाद सरस्तच्च गूढो यत्र शतक्रतु:,शल्य कहते हैं--युधिष्ठि!! तदनन्तर अग्निदेव छोटे गड़ढेसे लेकर बड़े-से-बड़े समुद्रतकके जलमें प्रवेश करके पता लगाते हुए क्रमश: उस सरोवरमें जा पहुँचे, जहाँ इन्द्र छिपे हुए थे
舍利耶说道:“尤提施提罗啊!其后,火神阿耆尼潜入诸水之中——自小小洼水以至浩瀚大海——循迹探寻,终于抵达那座池沼,百祭主(因陀罗)正隐匿其间。”
शल्य उवाच