उलूकदूतवाक्यम् / Ulūka’s Message to the Pāṇḍavas
कौरवाणां कुले जात: पाण्डो: पुत्रो विशेषत:,“वीर! मैं कौरवोंके कुलमें उत्पन्न हुआ हूँ। विशेषतः महाराज पाण्डुका पुत्र हूँ। आचार्य द्रोणको अपना गुरु कहता हूँ और स्वयं उनका शिष्य कहलाता हूँ। इसके सिवा साक्षात् भगवान् श्रीकृष्ण हमारे सहायक हैं और मैं अपने हाथमें गाण्डीव धनुष धारण करता हूँ। ऐसी स्थितिमें मैं अपने-आपको डरा हुआ कैसे कह सकता हूँ?
kauravāṇāṃ kule jātaḥ pāṇḍoḥ putro viśeṣataḥ |
毗舍摩波耶那说道:“勇士啊!我生于俱卢(考罗婆)一族之裔——更确切地说,我乃般度王之子。我奉阿阇梨德罗那为师,自认其门下弟子。况且,圣主室利·克里希纳亲自为我等助力,而我手中执持甘狄婆神弓。如此境况之下,我又怎能说自己畏惧?”
वैशम्पायन उवाच