Rukmī’s Offer of Aid and Arjuna’s Refusal (रुक्मिप्रस्तावः—अर्जुनप्रत्याख्यानम्)
रश्मिवतामिवादित्यो वीरुधामिव चन्द्रमा: । कुबेर इव यक्षाणां देवानामिव वासव:,'जैसे किरणोंवाले तेजस्वी पदार्थोंके सूर्य, वृक्ष और ओषधियोंके चन्द्रमा, यक्षोंके कुबेर, देवताओंके इन्द्र, पर्वतोंके मेरु, पक्षियोंके गरुड़, समस्त देवयोनियोंके कार्तिकिय और वसुओंके अग्निदेव अधिपति एवं संरक्षक हैं (उसी प्रकार आप हमारी समस्त सेनाओंके अधिनायक और संरक्षक हों)
raśmivatām ivādityo vīrudhām iva candramāḥ | kubera iva yakṣāṇāṃ devānām iva vāsavaḥ ||
毗湿摩波耶那说:“正如太阳为诸光明之首,月亮为草木药植之首,俱毗罗为夜叉之首,婆娑婆(因陀罗)为诸天之首——愿你也如此,成为我军诸部的统帅与守护者。”
वैशम्पायन उवाच