ज्योतींषि प्रतिकूलानि दारुणा मृगपक्षिण: । उत्पाता विविधा वीर दृश्यन्ते क्षत्रनाशना:,“वीर! ग्रह और नक्षत्र प्रतिकूल हो रहे हैं। पशु और पक्षी भयंकर शब्द कर रहे हैं तथा नाना प्रकारके ऐसे उत्पात (अपशकुन) दिखायी देते हैं, जो क्षत्रियोंक विनाशकी सूचना देते हैं
“勇士啊!诸星辰与宿曜皆呈逆相;兽与鸟发出凄厉可怖之声。种种异变凶兆显现——皆是预告刹帝利将遭毁灭的征象。”
वैशम्पायन उवाच