भीष्मद्रोणयोर्दुर्योधनं प्रति शमोपदेशः | Bhīṣma and Droṇa’s Counsel of Conciliation to Duryodhana
यत्र सा बृहती श्यामा सभायां रुदती तदा । अश्रौषीत् परुषा वाचस्तन्मे दुःखतरं महत्,श्रीकृष्ण! मुझे राज्यके छिन जानेका उतना दुःख नहीं है। जुएमें हारने और पुत्रोंके वनवास होनेका भी मेरे मनमें उतना महान् दुःख नहीं है, परंतु भरी सभामें मेरी सुन्दरी युवती पुत्रवधू द्रौपदीने रोते हुए जो दुर्योधनके कटुवचन सुने थे, वही मेरे लिये महान् दुःखका कारण बन गया है
yatra sā bṛhatī śyāmā sabhāyāṃ rudatī tadā | aśrauṣīt paruṣā vācas tan me duḥkhataraṃ mahat ||
“当那位身形高挑、肤色黝黑的贵妇在王廷大会中哭泣时,她竟不得不听受粗暴而残忍的言语。噢,圣克里希纳!这才是我最深、最难忍的悲痛——并非失国之痛,也非掷骰败北与诸子流放之苦;而是我那年轻而高贵的儿媳德劳帕蒂在拥挤的朝廷中遭受羞辱,被迫承受杜尤陀那苦毒的言辞。”
पुत्र उवाच