अविधेयानि हीमानि व्यापादयितुमप्यलम् । अविधेया इवादान्ता हया: पथि कुसारथिम्,'जैसे उद्दण्ड घोड़े काबूमें न होनेपर मूर्ख सारथि-को मार्गमें ही मार डालते हैं, उसी प्रकार यदि इन इन्द्रियोंको काबूमें न रखा जाय तो ये मनुष्यका नाश करनेके लिये भी पर्याप्त हैं
正如不受驾驭的烈马,足以在途中害死愚拙的御者;同样,这些感官若不加约束,也足以使人走向毁灭。
वैशम्पायन उवाच