Udyoga Parva, Adhyāya 106: Pūrva-Diśa Praśaṃsā
Praise and Primacy of the Eastern Quarter
प्रतिश्रुत्य करिष्येति कर्तव्यं तदकुर्वत: । मिथ्यावचनदग्धस्य इष्टापूर्त प्रणश्यति,“जो “करूँगा” ऐसा कहकर किसी कार्यको पूर्ण करनेकी प्रतिज्ञा कर ले, परंतु आगे चलकर उस कर्तव्यका पालन न कर सके, उस असत्यभाषणसे दग्ध हुए पुरुषके “इष्ट"' और 'आपूर्त' सभी नष्ट हो जाते हैं
那罗陀说道:“凡许诺‘我必为之’而受其当行之事,后又不履行者,必为虚言所焚;其‘伊什塔’与‘阿普尔塔’(祭祀之功与公益善行之德)尽皆毁灭。”
नारद उवाच