शोक-शमन उपदेशः
Instruction on the Pacification of Grief
यथा जीर्णमजीर्ण वा वस्त्र त्यक्त्वा तु पूरुष: अन्यद् रोचयते वस्त्रमेवं देहा: शरीरिणाम्,जैसे मनुष्य नये अथवा पुराने वस्त्रको उतारकर दूसरे नूतन वस्त्रको पहननेकी रुचि रखता है, उसी प्रकार देहधारियोंके शरीर उनके द्वारा समय-समयपर त्यागे और ग्रहण किये जाते हैं
正如人脱下新衣或旧衣,转而喜取他衣;同样,具身者的身体也被其在时节流转中一次次舍弃、一次次摄受。
विदुर उवाच