Treasury Security, Protection of Informants, and the Kalakavṛkṣīya Exemplum (Śānti Parva 83)
न्यायतो दुष्कृते घात: सुकृते न कथंचन । नेह युक्त स्थिरं स्थातुं जवेनैवाव्रजेदू् बुध:,न््यायकी बात तो यह है कि बुराई करनेवालेको ही मारा जाय और पुण्य--श्रेष्ठ कर्म करनेवालेको किसी तरह भी कोई कष्ट न होने पावे, परंतु यहाँ ऐसा नहीं होता; अत: इस राज्यमें स्थिरभावसे निवास करना किसीके लिये भी उचित नहीं है। विद्वान् पुरुषको यहाँसे अति शीघ्र हट जाना चाहिये
nyāyato duṣkṛte ghātaḥ sukṛte na kathaṃcana | neha yuktaṃ sthiraṃ sthātuṃ javenaivāvajed budhaḥ ||
毗湿摩说道:“按公正之法,惩罚应落在作恶者身上,而行善积德者不应遭受丝毫伤害。然而世间并非如此。因此,任何人都不宜在此怀着久居之心;智者当速速离去。”
भीष्म उवाच