धन-राजधर्म संवादः
Discourse on Wealth and Royal Duty
धर्म: कामश्न स्वर्गश्न हर्ष: क्रोध: श्रुतं दम: । अथदितानि सर्वाणि प्रवर्तन्ते नराधिप,नरेश्वर! धनसे धर्मका पालन, कामनाकी पूर्ति, स्वर्गकी प्राप्ति, हर्षकी वृद्धि, क्रोधकी सफलता, शास्त्रोंका श्रवण और अध्ययन तथा शत्रुओंका दमन--ये सभी कार्य सिद्ध होते हैं
大王啊!凭借财富,方能奉行法(dharma)、满足欲望、得生天界、增长欢喜、使忿怒得逞、聆听并研习经典,以及镇压仇敌——这一切事业皆可成就。
अर्जुन उवाच