Prāyaścitta and Contextual Non-Culpability (प्रायश्चित्त-निमित्त-अदोषवाद)
महाव्रतं चरेद् यस्तु दद्यात् सर्वस्वमेव तु । गुर्वर्थे वा हतो युद्धे स मुच्येत् कर्मणो5शुभात्,स्त्रियाँ भी एक वर्षतक मिताहार एवं संयमपूर्वक रहनेपर उक्त पापकर्मोसे मुक्त हो जाती हैं। जो महाव्रतका (एक महीनेतक जल न पीनेके नियमका) पालन करता है, ब्राह्मणोंको अपना सर्वस्व समर्पित कर देता है अथवा गुरुके लिये युद्धमें मारा जाता है, वह अशुभ कर्मके बन्धनसे मुक्त हो जाता है
mahāvrataṃ cared yas tu dadyāt sarvasvam eva tu | gurvarthe vā hato yuddhe sa mucyeta karmaṇo'śubhāt ||
毗耶娑说:凡行持大誓(摩诃誓),或尽舍其一切财物,或为师长之故战死沙场者——皆得解脱不祥之业的系缚。此教诲昭示:严峻的自律、彻底的布施,以及以忠诚奉事而自我牺牲,皆能成为强有力的道德净化之道。
व्यास उवाच