धर्मस्य बहुद्वारत्वम् — Nārada’s Audience with Indra (Śānti-parva 340)
सिद्धा होते महाभागा: पुरा होकान्तिनो5भवन् | तमोरजोभिरननिमिुक्ता मां प्रवेक्ष्यन्त्यसंशयम्,“यहाँ निवास करनेवाले ये सभी महाभाग सिद्ध हो चुके हैं। ये पहले भी मेरे अनन्य भक्त रहे हैं। ये तमोगुण और रजोगुणसे मुक्त हैं; अतः निःसंदेह मुझमें ही प्रवेश करेंगे
siddhā hote mahābhāgāḥ purā hy ekāntino 'bhavan | tamo-rajobhir anirmuktā māṁ pravekṣyanty asaṁśayam ||
毗湿摩说道:“凡居于此的诸位福德之士,皆已成就圆满。往昔他们亦是我唯一的奉信者。既脱离惰暗之昏沉(tamas)与激动之躁动(rajas),他们必定无疑将归入我之中。”
भीष्म उवाच