अश्वशिरो-आख्यानम्
Aśvaśiras / Hayaśiras Narrative: Retrieval of the Vedas
ये हीना: सप्तदशभिर्गुणै: कर्मभिरेव च । कला: पज्चदश त्यक्ता ते मुक्ता इति निश्चय:,जो पाँच ज्ञानेन्द्रिय, पाँच कर्मन्द्रिय, पाँच प्राण तथा मन और बुद्धिरूप सत्रह गुणोंसे, सब कर्मोसे रहित हो पंद्रह कलाओंको त्याग करके स्थित हैं, वे ही मुक्त हैं, यह शास्त्रका सिद्धान्त है
凡离于十七种要素——五知根、五作根、五气(普拉那),以及意与智——又远离一切业行,并舍弃十五种“分”(kalā)而安住者,决定称为解脱;此乃经论之定说。
नारद उवाच