अध्याय २९४ — योगलक्षणम् तथा सांख्यपरिसंख्यानम्
Yoga Definition and Sāṃkhya Enumeration
श्रूयन्ते हि पुराणेषु प्रजा धिग्दण्डशासना: । दान्ता धर्मप्रधानाश्च न्यायधर्मानुवृत्तिका:,पुराणोंमें सुना जाता है कि पहले अधिकांश मनुष्य संयमी, धार्मिक तथा न्यायोचित आचारका ही अनुसरण करनेवाले थे। उस समय अपराधियोंको धिक्कारमात्रका ही दण्ड दिया जाता था
诸《往世书》(Purāṇa)中传闻:在上古之时,百姓受治,刑罚不过一声呵责;人多自制,以法(dharma)为先,循正理之道而行。
पराशर उवाच