Jājali–Tulādhāra-saṃvāda: Yajña, Vṛtti, and Ātma-tīrtha (जाजलि-तुलाधार-संवादः)
कस्य मृत्यु: कुतो मृत्यु: केन मृत्युरिह प्रजा: । हरत्यमरसंकाश तनमे ब्रूहि पितामह,ये जो नरेश मृत्युको प्राप्त हो गये हैं, इनमें बहुत-से भयानक पराक्रमसे सम्पन्न हैं। यहाँ मेरे मनमें यह संदेह होता है कि इन्हें मृत नाम कैसे दिया गया? किसकी मृत्यु होती है? किससे मृत्यु होती है? और किस कारणसे मृत्यु यहाँ समस्त प्राणियोंका अपहरण करती है? देवतुल्य पितामह! मुझे यह सब बतानेकी कृपा करें
yudhiṣṭhira uvāca |
kasyā mṛtyuḥ kuto mṛtyuḥ kena mṛtyur iha prajāḥ |
haraty amara-saṅkāśa tan me brūhi pitāmaha ||
尤提士提罗说:“死亡属于谁?死亡从何而生?凭借何种作用,死亡在此世发生,又如何夺走有情众生?噢,祖父,光辉如不死者,请告知我。”
युधिछिर उवाच