अव्यक्त-मानस-सृष्टिवादः
Doctrine of Creation from the Unmanifest ‘Mānasa’
पिड्नला बोली--मेरे सच्चे प्रियतम चिरकालसे मेरे निकट ही रहते हैं। मैं सदासे उनके साथ ही रहती आयी हूँ। वे कभी उन्मत्त नहीं होते; परंतु मैं ऐसी मतवाली हो गयी थी कि आजसे पहले उन्हें पहचान ही न सकी ।। एकस्थूणं नवद्वारमपिधास्याम्यगारकम् | का हि कान्तमिहायान्तमयं कान्तेति मंस्यते
ekasthūṇaṁ navadvāram apidhāsyāmy agārakam | kā hi kāntam ihāyāntam ayaṁ kānta iti maṁsyate ||
婆罗门说道:“此身如一小屋,一柱支撑,九门出入。我将闭之而加以摄持。因为谁见‘爱者’来到此处,还会以为‘这就是我的爱者’呢——当真正的爱者并非外在形相,而是内住之我(自我/我性,Ātman)?”
ब्राह्मण उवाच