यदि सा रुक्तनेत्रान्ता चित्राड़ी मधुरस्वरा । अद्य नायाति मे कानन््ता न कार्य जीवितेन मे,“जिसके नेत्रोंके प्रान््न्भाग कुछ-कुछ लाल हैं, अंग चितकबरे हैं और स्वरमें अद्भुत मिठास भरा है, वह मेरी प्राणवल्लभा यदि आज नहीं आ रही है तो मुझे इस जीवनसे क्या प्रयोजन है?
“她眼角微红,肢体斑斓如画,声音又含着奇异的甘甜。若今日我那视若性命的爱侣不来,我这条命又有何用?”
भीष्म उवाच